Thursday, October 12, 2017

जीने के बहाने!!

हो कितनी भी निराशा या खोया हो विश्वास,
चलता चल कि जीने के बहाने मिलेंगे ज़रूर||
सूना हो कितना भी मन का आँगन आज पर कल,
कहानी भी बनेंगी और अफ़साने मिलेंगे ज़रूर||
घिरे हो कितना भी तन्हाइयों में पर याद रखना,
कभी अपने तो कभी अनजाने मिलेंगे ज़रूर||,
थक के हार मत मान लेना न रुक जाना तुम कहीं,
कभी मंजिलें तो कभी सुकून के सिरहाने मिलेंगे ज़रूर||

~ वैभव